Solar System
आज के इस आर्टिकल में हम बात करने वाले हैं सोलर सिस्टम के बारे में कि आपको अपने घर में कितना बड़ा सोलर सिस्टम लगवाना चाहिए कौन से टाइप का Solar System आपको लगाना चाहिए कौन से उसके अंदर आपको इन्वर्टर या फिर पीसीओ लेना चाहिए और कौन से टाइप के सोलर पैनल आपको लेने चाहिए,
काफी सारे लोग यह गलती करते हैं कि जब भी सोलर सिस्टम लेते हैं या फिर नया सोलर प्लांट लगवाते हैं तो उनको सोलर की जानकारी न होने के कारण वो गलत प्रोडक्ट जो है वो खरीद लेते हैं जिस वजह से उनका पैसा भी लग जाता है और उनको सोलर सिस्टम का कोई बेनिफिट भी नहीं मिलता है तो इसीलिए आपसे ऐसी गलती ना हो इसीलिए
हम आपको इस आर्टिकल में सभी जानकारी देने वाले है कि सोलर सिस्टम लगवाने से पहले आपको किन-किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए और कौन सा सोलर पैनल कौन सा सोलर इनवरर्टर है और कौन सी बैटरी आपको लेनी चाहिए, तो चलिए जानते है इस आर्टिकल में।
Type Of Solar System
हम बात करते है सबसे पहले सोलर सिस्टम के टाइप के बारे में, तो सबसे पहले हमारा आता है ऑनग्रिड सोलर सिस्टम ऑनग्रेड सोलर सिस्टम वहां लगवाया जाता है जैसे खेतों में आपको समर्सिबल वगैरह चलाना है या फिर स्कूल कॉलेजों में जहां पर दिन के समय में काम चलता है और दिन के समय में आपको लाइट की जरूरत है या फिर आपके घर का बिजली बिल बहुत ज्यादा आ रहा है और आप यह सोच रहे है,
कि मैं अपने घर का बिजली बिल कम करूं और दिन के समय में अपने घर का सारा लोड सोलर से चलाऊं यानी कि जहां पर पावर कट बहुत कम है और बिजली बिल बहुत ज्यादा आ रहा है वहां के लिए On Grid Solar System बेस्ट ऑप्शन रहेगा क्योंकि एक तो ऑनग्रेड सोलर सिस्टम में आपको सिर्फ ऑनग्रेड इनवर्ट लेना होगा और सोलर पैनल लेने होंगे इसके अलावा आपको कोई प्रोडक्ट नहीं खरीदना है तो अगर आपको बिजली बिल कम करना है तो आपके लिए ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम बेस्ट रहेगा।
Off Grid Solar System
अब बात करते है ऑफ ग्रिड Solar System तो ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम में क्या है कि आपके घर का मेन ग्रिड का जो कनेक्शन है वह पूरी तरह से कट होता है यानी कि जो पूरा सिस्टम आपका चलेगा वो सोलर से चलेगा यानी जितना भी आपका लोड होगा सोलर से चलेगा ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम में को बैटरी बैकअप मिल जाता है और सोलर पैनल मिल जाते हैं और एक सोलर इनवरर्टर मिल जाता है तो दिन के समय में आपके घर का लोड जो है वह सोलर से चलता रहेगा डायरेक्ट और आपकी बैटरी चार्ज होती रहेगी और रात के समय के लिए आपको बैटरी बैकअप मिल जाएगा।
लेकिन घरों में वैसे मेन ग्रिड ऑफ होती नहीं है क्योंकि साथ ही साथ ग्रिड कनेक्शन रखना भी बहुत जरूरी है क्योंकि कई बार मौसम खराब होता है दो-दो तीन-तीन दिन लगातार बारिश होती है और आंधी तूफान वगैरह आते हैं तो लोगों के घरों में ग्रिड सप्लाई जरूर रहती है तो जब आपके घर का लोड सोलर से चलता है तब तक आपका सोलर से काम चलता रहेगा और बैटरी बैकअप के लिए आपको बैटरी बैकअप मिल जाता है और जब सोलर पैनल से पावर जनरेशन कम होती है या फिर सोलर पैनल से बिजली बनना बंद हो जाती है यानी मौसम खराब है या कोई भी कारण है तो उस समय आप अपने घर की मेन सप्लाई से अपने बैटरी बैटरीियों को भी चार्ज कर सकते हैं और अपने घर का लोड भी चला सकते हैं।
Hybrid Solar System
अब बात करते है हाइब्रिड सोलर सिस्टम hybrid solar system में क्या है कि ऑन ग्रिड और ऑफ ग्रिड दोनों का कॉम्बो है यानी कि इसके अंदर आपको एक हाइब्रिड इनवरर्टर मिल जाता है जिसके ऊपर आप इनवरर्टर की स्पेसिफिकेशन के हिसाब से सोलर पैनल लगा सकते हैं और उसकी स्पेसिफिकेशन के हिसाब से दो चार जितनी भी उसकी कैपेसिटी आप बैटरी लगा सकते हैं
इसके अलावा आप नेट मीटरिंग करा के आप वापस ग्रिड में सप्लाई भी कर सकते हैं जैसे ऑनग्रेड सोलर सिस्टम में होता है यानी कि आपके घर का बिजली बिल बहुत ज्यादा आ रहा है और आपको बैटरी बैकअप की भी जरूरत है तो आपके लिए हाइब्रिड सोलर सिस्टम बेस्ट रहेगा इसमें आपको ऑनग्रेड और ऑफ ग्रिड के दोनों फायदे मिल जाते हैं।
अगर आपको बिजली बिल कम करना है तो ऑन ग्रेड सोलर सिस्टम (On Grid Solar System) बेस्ट रहेगा अगर आपके एरिया में पावर कट कम है तो और अगर आपके एरिया में पावर कट बहुत ज्यादा है तो फिर आपको ऑफ ग्रिड या फिर हाइब्रिड सोलर सिस्टम (hybrid solar system) लेना चाहिए,
Which inverter should we buy?
हमें इन्वर्टर कौन सा ख़रीदे? तो देखिए अभी तक मार्केट में दो टेक्नोलॉजी के इन्वर्टर या फिर पीसीयू आते हैं एक PWM and a MPT, PWM टेक्नोलॉजी जो है वो काफी ज्यादा पुरानी हो गई है इसलिए यह आपके सोलर सिस्टम से जो आपकी पावर जनरेशन होती है उसकी एफिशिएंसी को 30% तक कम कर देता है
जबकि MPT टेक्नोलॉजी के अंदर आपकी जो पावर जनरेशन है वो एक्यूरेट आपको मिलती है इसके अलावा यह टेक्नोलॉजी आपके सोलर पैनल से आने वाली मैक्सिमम पावर को यूज़ करता है और उसको मैक्सिमम एंपियर में कन्वर्ट करके आपके घर की जो सोलर बैटरी होती है उसको भी चार्ज करता है और आपके घर के लोड को भी चलाता है तो जब भी आप नया सोलर इनवरर्टर लें तो ध्यान रखें कि एमपीपीटी टेक्नोलॉजी का ही आपको लेना है।
आपको छोटा Solar System लगवाना है यानी 2 किलो वाट 3 किलो वाट 5 किलो वाट तो आप Monopar Half Cut बाई फेशियल या फिर Top Con टेक्नोलॉजी ले सकते हैं इसके अलावा अगर आपको डायरेक्ट 3 किलो वाट 5 किलो वाट 10 किलो वाट इस तरह का बड़ा सिस्टम लगवाना है तो आप HJT N-type Technology का भी यूज़ कर सकते हैं
क्योंकि HJT Technology जो है वो लेटेस्ट टेक्नोलॉजी है दूसरा इनके जो सोलर पैनल आते हैं वो बड़े साइज में आते हैं जैसे कि 700 वाट 715 वाट 730 वाट 750 वाट 800 वाट इस तरह से बड़े साइज के सोलर पैनल आते हैं एच जेटी टेक्नोलॉजी के अंदर जबकि Monopar Half Cut biFacial and Top Con Technology जो है वो सेम सी ही है और इनके सेम ही कैपेसिटी के आपको सोलर पैनल मिल जाते हैं बस इनकी एफिशिएंसी में आपको डिफरेंस मिलेगा।
Solar System Price
प्राइस की यहां पर बात करें तो लगभग यह तीनों ही टाइप के सोलर पैनल आपको ₹18 पर वाट से लेकर 20 से 22 पर वाट के बीच में मिल जाएंगे ठीक है दोस्तों तो यह हमारी बात हो गई दोस्तों कि आपको कौन से टाइप का सोलर सिस्टम लेना चाहिए कौन सी टेक्नोलॉजी का इन्वर्टर लेना चाहिए और कौन से सोलर पैनल लेना चाहिए।
lead acid battery जो है आपको 12 Volt के अंदर मिलती है और एक 12 Volt की 150Ah की सोलर बैटरी लगभग 10 से ₹12000 हजार के बजट में मिल जाती है तो आपको सस्ता सोलर सिस्टम लगवाना है तो आप लेड एसिड बैटरी ले सकते हैं और बाद में आप lithium ion batteries लगा सकते हैं तो अगर आपका बजट ठीक-ठाक है तो आप lithium ion या फिर Lithium Phosphate Battery ले सकते हैं नहीं तो आप नॉर्मल 150ah की सोलर बैटरी ले सकते हैं।
अगर आपका total load 1500watt है तो आपको कम से कम। 2.50kw Solar System लगवाना चाहिए और अगर आपका टोटल लोड 2kw है तो आपको कम से कम 3kw Solar System लगवाना चाहिए, आप अपनी जरुरत की हिसाब से लगवा सकते है।
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